Saturday, April 30, 2022

खीरा खाने के fayde

खीरे को फल एवं शाक दोनों ही रूप में जाना जाता है। यह शरीर में खनिज लवण तथा विटामिंस की पूर्ति के लिए उत्तम आहार है। खीरा रोज उपयोगी फल के साथ-साथ आहार में एवं सलाद के रूप में सेवन किया जाता है। यह स्वाद के साथ-साथ अनेकों गुणसे परिपूर्ण है।

खीरे में आद्रता ,प्रोटीन, वसा ,कार्बोहाइड्रेड, खनिज द्रव्य, कैल्शियम , फास्फोरस, लौह तत्व, विटामिन होता है उसके बीजों में प्रोटीन ,वसा होता है इससे एक हल्का पीत वर्ण निकलता है। खीरा खाने के तुरंत बाद पानी न पीने की सलाह दी जाती है जिसे ph लेवल संतुलित रहता है और पाचन क्रिया सही रहती है।

बाल (कोमल) खीरा विशेष रूप से गुणकारी होता है इसके गुणों के कारण इसे बालम खीरा नाम से भी पुकारा जाता है।

खीरे के गुण 

१. कब्ज से राहत - पेट की जलन को कम करता है। पानी की कमी को पूरा करने व कब्ज की समस्या में राहत दिलाने में खीरा विशेष रूप से उपयोगी है।यह शरीर से विसैले तत्वों को निकाल कर आंतों की सफाई करता है।

२. आंतरिक और बाहरी सफाई - खीरा में पर्याप्त मात्रा में जल और फाइबर पाया जाता है जो आंतरिक रूप से शरीर की सफाई करता है। चहरे की झाइयां और सनबर्न को भी ठीक करता है ।खीरे के स्लाइस आंखों में रखने से आंखों का कालापन दूर होता है।

३. वजन को नियंत्रित - वजन कम करने की इच्छा रखने वालों को अपने आहार में रोजाना खीरे को शामिल करना चाहिए। इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है और पेट भी भरा लगता है।

४. कैंसर की रोकथाम- खीरा का नियमित सेवन करने वालों को कैंसर होने का खतरा कम रहता है। इसमें पाए जाने वाले तत्व कैंसर की रोकथाम में सहायक होते हैं।

५ . मधुमेह में उपयोगी - मधुमेह के रोगियों को अल्पाहार के रूप में ये अच्छा विकल्प है।हल्के भोजन के रूप में रोगियों को खीरा खाने की सलाह दी जाती है।

६ . मुत्रवह संस्थान के विकारों-को दूर करने में खीरा विशेष रूप से उपयोगी है।मूत्रावरोध,मूत्र स्थान की पथरी जैसे विकारों को दूर करता है।

खीरा रक्त की कमी, पीलिया, हाई ब्लड प्रेशर, यकृत विकार, नेत्रों की जलन,आदि अनेक रोगों में औषधि का काम करता है।अनेक पौष्टिक तत्वों से भरपूर खीरे को अपने भोजन में अवश्य स्थान दे।ये शारीरिक सौंदर्य को बढ़ाता है। अनेक बीमारियों को दूर कर शरीर को स्वस्थ रखता है। 

                                   By Rachna Mishra 

Tuesday, April 26, 2022

गुणकारी शहद fayde in Hindi

शहद आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का महत्वपूर्ण तत्व है, इसके बिना आयुर्वेदिक औषधि उपचार अधूरा माना जाता हैं। प्रकृति में जो विविध पुष्प रस भरे पड़े हैं, मधुमक्खी इन्ही पुष्पों के से शहद तैयार करती है। कई प्रकार की मधुमक्खियां होती लेकिन अपनी देसी मक्खी का शहद ही गुणकारी और स्वादिष्ट होता है।

शुद्ध शहद की पहचान

शहद आदि काल से ही मधुर द्रव्य का प्रतिनिधि कर रहा है । इसके प्रयोग से ही इसकी उपयोगिता एवं औषधीय गुणों की जानकारी होती है। शहद में कई तत्व विद्यमान है, इसमें ग्लूकोस प्रक्टोज पर्याप्त मात्रा में होता है। शुद्ध शहद पानी में अपने आप नहीं घुलता, जबकि चीनी थोड़ी ही देर में स्वतः हो घुल जाती है, यह शहद की  सामान्य पहचान है । जो शायद जितना गाढ़ा होगा, उसमें नमी की जितनी कमी होगी शुद्धता की दृष्टि से उतना ही अच्छा माना जाता है । शहद ठंड में जम जाता है और गर्मियों से स्वता ही पिघलने लगता है।

शहद के औषधीय गुण

१. शहद की अपनी तासीर गर्म होती है खासकर जिस समय इसे छत्ते से निकालते हैं उस समय इसका प्रभाव अधिक होता है, धीरे-धीरे इसका प्रभाव सामान्य हो जाता है ।

२. शहद का विशेष गुण यह भी है कि गर्म पानी में लेने से गर्म तथा शीतल पानी में मिलाकर उपयोग करने से ठंडा होता है। प्रातः और सायं गर्म पानी में मिलाकर शहद पीने से शरीर की चर्बी कम होती है।

 ३. आंखों में एक bood प्रतिदिन डालने से आंख की ज्योति बढ़ती है।

 ४. इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। गर्मियों में शहद की शिकंजी जिसमें एक बड़े गिलास में दो चम्मच शहद और एक दो बूंद नींबू का रस मिलाकर पीने से शरीर को तत्काल ऊर्जा मिलती है। और इससे पेशाब भी खुलकर होता है। 

५. अदरक तुलसी के रस को चम्मच में गर्म कर उसमें शहद मिलाकर उपयोग करने पर यह योग खांसी जुखाम में रामबाण प्रमाणित होता है।

 ६.केवल शहद खाने से भी फायदा होता है शहद को खाते ही तत्काल घुलकर शरीर में सीधे ऊर्जा देता है। जितना जल्दी शहद पचता है, उतना जल्दी अन्य कोई पदार्थ नहीं पचता।

८.फोड़े फुंसियों पर एंटीसेप्टिक निरोधक का काम करता है । चेचक के दाग शहद और नीबू के रस से हलके किए जा सकते हैं । इन्हें मिलाकर लगाया जाता है जिससे चेहरे की कांति लौट आती है। 

९. शहद का नित्य सेवन करने से दिल और दिमाग को शक्ति देता है, तथा दीर्घ जीवन प्रदान करता है ।

शायद को एक अर्थ में अमृत कहा जाता है। ज्यादा पुराना शहद अपना स्वाद, रंग और गुण खो देता है। इसलिए ताजे शहद का प्रयोग ही अधिक करना चाहिए।शहद का सेवन विशेषकर बच्चों और बूढ़ों को अधिक करना चाहिए।



Sunday, April 24, 2022

गर्मियों में अंगूर खाने के फायदे

अंगूर सभी फलों में स्वादिष्ट एवं उत्तम फल है। पकने पर सु मधुर और गुणकारी हो जाता है ।आयुर्वेद में अंगूर को सेहत का खजाना बताया गया है।भारत ही नहीं दुनिया के अनेक देशों में अंगूर रोगों को दूर करने का माध्यम माना गया हैं।अंगूर खाने से शरीर स्वस्थ सुंदर ,सुडौल बनता है और मानसिक अवसाद भी दूर होता है।

अंगूर के गुण -

शरीर को ऊर्जा प्रदान :-

इसमें सर्वोत्तम प्रकार का ग्लूकोज एवम प्रक्तोज होता है,जिससे रस पेट में पहुंचते ही शीघ्रता से सुपाच्य हो शरीर में ऊर्जा तथा ताप प्रदान करके शक्ति की वृद्धि करता है।

आंखों के लिए उपयोगी :-

अंगूर बलवर्धक, आंखों के लिए हितकारी और वातपित्त की वृद्धि को दूर करता है तथा खून भी बढ़ाता है ।सभी तरह के ज्वर में लाभकारी है।
 

खून की पूर्ति :-

 अंगूर में शर्करा 25% होती है। लोहा पर्याप्त मात्रा में होता है, जो खून में हिमोग्लोबिन बढ़ाता है ।खून की कमी वाले रोगों के लिए यह वरदान स्वरुप है ।

पेट सफाई :-

यह प्रबल कीटाणुनाशक है । इससे आंत तथा लीवर और किडनी अच्छी तरह काम करते हैं ।कब्ज दूर होता है ।मूत्र मार्ग की बाधाएं दूर होती हैं।

शक्ति वर्धक :-

अंगूर में पर्याप्त मात्रा में  विटामिन ए और सी है। बच्चे बूढ़े और दुर्बल लोगों के लिए बल देने वाला अनुपम आहार है। अंगूर खाने से ताकत आती है।यह हर प्रकार की कमजोरी को दूर करके शरीर को सुंदर और स्वस्थ बनाता है।

मिनरल्स की पूर्ति :-

इसमें पोटेशियम बहुत होता है जो किडनी के रोग ,हाय ब्लड प्रेशर ,तथा चर्म रोग में लाभकारी होता है। अंगूर मैग्नीशियम का भी अच्छा स्रोत है।

अनेक रोगों की दवा :-

अंगूर रोगियों के लिए उत्तम है, कैंसर ,टीबी, गैस्ट्रिक के घाव ,बच्चों का सूखा रोग, अपेंडिसाइटिस ,जोड़ों का दर्द गठिया तथा हृदय रोगियों के लिए शक्ति दायक फल है

रक्त शुद्ध :-

 अंगूर प्रबल छारिय आहार है, शरीर में खून बढ़ाता है और इसे साफ करता है। शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है ।

ज्वर नाशक :-

टाइफाइड बुखार हो या कोई वायरस जन्य बुखार सभी में अंगूर शरीर में नई शक्ति देने के लिए प्रयोग किया जाता है।

 कई लाइलाज बीमारियों में अंगूर रस कल्पामृत के समान काम करता है। लंबी बीमारी के बाद शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में यह रामबाण दवा है कई आंतों के कैंसर रोगी अंगूर कल्प से स्वस्थ हुए हैं ।

अंगूर खट्टा होता है, उसे नहीं खाना चाहिए जब भी अंगूर खाए मीठे पके अंगूर ही खाए । खाने के पहले अंगूर को भलीभांति पानी से धो लें , क्योंकि अंगूर की खेती करने वाले इसमें कीटाणुनाशक दवाई का छिड़काव करते हैं तथा उन पर मच्छर और मक्खियां भी बैठती हैं।
 पके अंगूर सुखाने से किसमिस बनते हैं। जो कई आयुर्वेदिक दवाई  में प्रयोग होता है।
 अंगूर का रस छोटे बच्चों को 50 सी.सी. से अधिक नही देना चाहिए अधिक देने से दस्त आने लगते हैं वयस्क १००सी. सी.से 200 तक ले सकते हैं। शरीर में शक्ति संचार के लिए अंगूर का रस अदित्वीय है।

Thursday, April 21, 2022

आंवला के फायदे

 By Rachna Mishra 🌿

आंवला सर्वश्रेष्ठ शक्ति दायक फल है। इसका दूसरा नाम अमृत फल है। सचमुच ही इसमें अमृत के गुण है। यह विटामिन सी का अनंत भंडार है। एक पुष्ट आवले में 20 नरंगिओं के बराबर विटामिन सी रहता है, इस प्रकार यह शरीर को स्वस्थ बनाने के साथ-साथ सुंदर भी बनाता है। 

 आवले के गुण -

१. रक्त शुद्ध होता है और शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है।

२. आंवले की विशेषता यह है कि इसमें विटामिन गरम करने या सुखाने से भी नष्ट नहीं होते। 

३. त्रिफला चूर्ण का मुख्य घटक आंवला ही है।

४.चवनप्राश आवले से ही बनता है।भुजबल युवा अवस्था को isthir रखने बुढ़ापा दूर करने की ये सर्वश्रेष्ठ औषधि है। एक कथा है -

 महर्षि च्यवन ने बुढ़ापा दूर भगाने के लिए अश्विनी कुमार से उपाय पूछा था। उन्होंने चवन ऋषि को नित्य इस फल के सेवन करने के निर्देश दिए थे इसी के सेवन से चवन ऋषि का बुढ़ापा दूर हो गया था।

५. आंवला सर्व रोग नाशक दिव्य अमृत फल है यह दांतों मसूड़ों को मजबूत बनाता है ।

६.आंखों की ज्योति बढ़ाता है ।

७. शरीर में वीर्य की वृद्धि करता है। हाई ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग, कैंसर, नपुसंकता, मंदाग्नि ,स्नायु रोग, चर्म रोग लीवर और किडनी के रोग रक्त के रोग पीलिया, टीवी ,मूत्र रोग और हड्डी रोग दूर करने में इसका विशेष योगदान है।

८.आमला त्रिदोष नाशक है । इसमें लवड रस को छोड़कर बाकी पांचों रस भरे पड़े हैं। आधुनिक वैज्ञानिकों ने आंवला पर खोज की है और स्वीकार किया है कि अवला में पाए जाने वाला एंटी ऑक्सीडेंट एंजाइम बुढ़ापा को रोकता है। यह खोज तो हजारों वर्ष पहले भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों ने कर डाली थी ।

९.आंवला तेल सर के रोगों और बालों के लिए परम हितकारी है, इसे घर में बना लेना चाहिए बाजार में मिलने वाले अधिकांश आंवला तेल में कृतिम सेंट  रहते हैं। घर में बनाना चाहे तो तिल के तेल में ताजे आंवले का रस मिलाकर गर्म करें उसका पानी जल जाए तो उतार कर ठंडा करके और प्रयोग करें।

आंवले में जितने रोग प्रतिरोधक, रक्तशोधक और बल वीर्य वर्धक तत्व है वो संसार की किसीअन्य वस्तु या औषधि में नहीं। इसलिए स्वास्थ्य सुख चाहने वालों को अपने आहार में आंवले को प्रमुख स्थान देना चाहिए। लगभग 20 ग्राम चवनप्राश एक गिलास दूध के साथ नियमित सेवन करने सेआप इसके के चमत्कारी फल से परिचित हो जाएंगे ।ये पूर्णता प्रदान करने वाला सर्वश्रेष्ठ आहार है।

Tuesday, April 19, 2022

आम के औषधीय गुण in hindi

              By Rachna mishra                            

    आम एक सुपरिचित उपयोगी फल है, कच्चा आम अम्ल, वात ,पित्त्ववर्धक और पका आम मधुर, बलदायक सुखदायक,वातनाशक,शीतल ,कफऔर वीर्यवर्धक है। आम की मंजूरी (बौर) शीतल रुचिकारक ,वातकारक, अतिसार ,कफ पित्त और रुधिर नाशक है।

पाल  मे पकाकर भी आम खाया जाता है, परंतु इसमें जीवन शक्ति की न्यूनता होती है। आम का रस दूध के साथ पीने से शक्त्तिजनक और वीर्य वर्धक होता है। चूस कर प्रयोग किए जाने वाले आम को रसाल कहा जाता है। कलमी आम अत्यंत पित्तकारक होता है। आम के अति सेवन से मंदाग्नि, विषम ज्वर, रक्त दोष, नेत्र रोग उत्पन्न हो सकते हैं। अत्यधिक आम नहीं खाना चाहिए यह दोष कच्चे आम में देखे गए हैं। पके आम में विटामिन ए तथा सी अधिक मात्रा में होते हैं।

आम के अन्य उपयोग -

१. कच्चे आम को उबाल कर उसका रस निकाल कर उसमे भुना जीरा ,पुदीना और काला नमक डालकर पीने से लू नही लगती।कब्ज दूर होती हैं। पाचन क्रिया बढ़ती है। शुगर कंट्रोल होता है।पानी की कमी को पूरा करता है।

२. कच्चे आम की चटनी स्वादिष्ट होने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं।नई कोशिकाओं का निर्माण करती है। पेट संबंधी समस्याओं से छुटकारा दिलाती है।

३. कच्चे आम का अचार विटामिन k ,faibar एंटिऑक्सीडेंट युक्त होता है।इसे सीमित मात्रा में लिया जाए तो ये खाने का स्वाद भी बढ़ाता है।

४. पके आम में विटामिन c और फाइबर होता है जो की कैलोस्ट्रल को नियंत्रित करता है।विटामिन a आंखों के लिए उपयोगी है । पाचन क्रिया ठीक रखता है और मोटापा कम करने में भी सहायक है।

५.आम की गुठली भी बहुत गुणकारी है।इसकी गुठली को सुखाकर पीस लें व चूर्ण के रूप में इसका प्रयोग करे इसे पेट में गैस की समस्या से छुटकारा मिलता है। गुठली को मिस्री के साथ पीस कर दो चमचे दिन में तीन बार लेने से दस्त में लाभ होता है।

Sunday, April 17, 2022

छांछ(butter milk)ke fayde in hindi

          By Rachna Mishra 

  आरोग्य रक्षा की दृष्टि से छांछ एक महत्वपूर्ण पेय पदार्थ है। यह स्वादिष्ट, सुपाच्य, शक्ति एवं स्फूर्ति बढ़ाने वाला अमृतुल्य पेय हैं। पेट के रोगों के लिए यह रामबाण औषधि है। जिस प्रकार स्वर्ग में देवताओं के लिए अमृत प्रधान है, उसी प्रकार पृथ्वी पर मनुष्य के लिए छाछ प्रधान है।

आयुर्वेद की दृष्टि से मट्ठे के भिन्न-भिन्न लक्षणों के आधार पर इसका वर्गीकरण किया गया है -

मथित - 

मलाई निकाल कर जो दही बिना जल मथा जाए उसे mathit  कहते हैं।

घोल -

 मलाई सहित बिना जल के मथे हुए दही को घोल कहते हैं।

Takra (मट्ठा)- 

जिस दही में चतुरंश जल डाल कर मथा जाए उसे takra कहते हैं।

घोल- वात और पित्त नाशक है, mathit कफ और पित्त नाशक है, मट्ठा अथवा छांछ त्रिदोष नाशक है।

गाय के छांछ में विशेष गुण होते हैं, जो इस प्रकार हैं :-

१. वात रोग में छाछ एवं सेंधा नमक मिलाकर सेवन करना हितकर है।

 २.कफ दोष में शॉर्ट पेपर मरीज और छार युक्त छांछ हितकर है।

३.हींग जीरा और सेंधा नमक मिलाया हुआ छांछ वात नाशक , अर्श और अतिसार दूर करने वाला है।

४.नमक मिलाकर छाछ का सेवन करने से ग्रहणी रोग(पाचन तंत्र संबंधी) दूर करने का कार्य करता है और बिना नमक का छांछ ग्रहणी औरअर्श (बवासीर)का विनाश करने वाला है।

५.वजन को नियंत्रित करता है। इसमें वसा की मात्रा कम हों जाती है जिसे ये वजन को कम करने में सहायक है।

६. छांछ में कैल्शियम की उपस्थिति हड्डियों को मजबूत बनाती है। 

७. पानी की कमी की पूर्ति करता है, पेट की जलन में राहत मिलती है । पेशाब की जलन में भी लाभदायक है।शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता । 

८. छांछ के सेवन से त्वचा में चमक आती है, चेहरे के दाग धब्बे मिटाने का भी काम करता है।आटा के साथ मिला कर लेप लगाने से झुर्रियां कम होती हैं।

९. बालों के लिए भी छांछ का प्रयोग बहुत अच्छा होता है, छांछ में नींबूका रस मिला कर लगाने से सिर की रूसी और खुजली में आराम मिलता है।हफ्ते में दो तीन दिन छांछ द्वारा बालों को धोने से बालों में मजबूती व चमक आती है।

कच्चा छांछ कोष्ठ कफ का नाश करता है,कंठ स्थित कफ को बढ़ाता है। गरम छांछ पीनस, स्वास रोग में लाभदायक है।

छांछ नेत्ररोगोंका नाशक,बलकारक,रक्त और मांशवर्धक, पेट के दोषों को दूर करने वाला स्वादिष्ट पेय पदार्थ है।








Tuesday, April 12, 2022

त्रिफला के उपयोग एवम फायदे

 आजकल मनुष्य प्रकृति से जितना दूर होता जा रहा है, उतना ही वह विभिन्न रोगों से घिरता जा रहा है। स्वास्थ्य तथा दीर्घायु तक जीने के लिए एक बहुत ही उपयोगी पदार्थ है, त्रिफला। यदि कोई व्यक्ति त्रिफला का नियमित रूप से सेवन करता है,तो वो सभी रोगों से मुक्त हो सकता है। त्रिफला रोगों की एक अमृत दवा है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं।

त्रिफला में तीन पदार्थ है आंवला, बहेड़ा और पीली हरण। इन तीनों का सम्मिश्रण त्रिफला कहलाता है, यह तीनों पदार्थ सहज में ही मिल जाते हैं ,इन्हें प्राप्त कर घर पर ही त्रिफला का निर्माण किया जा सकता है।

त्रिफला के लिए इन तीनों पदार्थों के सम्मिश्रण का एक निश्चित अनुपात है पीली हरण का चूर्ण एक भाग बहेड़ी का चूर्ण 2 भाग आंवले का चूर्ण 3 भाग तीनों फलों की गुठली निकाल कर खरल आदि में कूट कर चूर्ण बना लें यह मिश्रण कांच की बोतल में भर कर कर रख दे ताकि बरसाती हवा इसमें ना पहुंच सके। 4 माह की अवधि बीत जाने पर इसे काम में नहीं लेना चाहिए ,क्योंकि है उतना उपयोगी नहीं रहता।

त्रिफला के सेवन विधि का भी हमें ज्ञान होना चाहिए। इसका 12 वर्ष नित्य, नियमित रूप से प्रातः बिना कुछ खाए ताजे पानी के साथ एक बार लेना चाहिए। उसके बाद 1 घंटे तक कुछ नहीं खाना पीना चाहिए। कितनी मात्रा में लिया जाए उसका भी एक विधान है- जितनी उम्र हो उतनी ही रत्ती लेनी चाहिए, परंतु एक बात ध्यान रहे त्रिफला के सेवन से एक या दो पतले दस्त होंगे किंतु घबराना नहीं चाहिए।

यदि त्रिफला प्रत्येक ऋतु में निर्णय वस्तुओं के साथ मिला कर लिया जाए तो इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है।

१.अगस्त और सितंबर में त्रिफला को सेधा नमक के साथ लेना चाहिए।

२.नवंबर में त्रिफला को शक्कर या चीनी के साथ त्रिफला के चूर्ण का छठा भाग कर लेना चाहिए।

३.दिसंबर और जनवरी में सोंठ के चूर्ण के साथ ।

४.फरवरी और मार्च में पीपल के चूर्ण के साथ सेवन करना चाहिए।

५.अप्रैल और मई में त्रिफला का सेवन शहद के साथ करना चाहिए।

६.जून और जुलाई में त्रिफला को गुड़ के साथ  चाहिए। प्रत्येक का छठा भाग।

इस क्रम और विधि से त्रिफला का सेवन करने से बहुत ही लाभ होता है। तन की सुस्ती दूर होती है। रोगों से मुक्ति मिलती है। नेत्र ज्योति बढ़ती है । शरीर सुंदर और बलशाली होता है।  बुद्धि का विकास होता है । बल अच्छे होते जाते हैं।  नेत्र ज्योति बढ़ती है। कंठ रोग दूर होते हैं ।वाक् सिद्धि प्राप्त होती है और तरुणाई आती है। इस प्रकार 12 वर्ष तक नियमित सेवन करना चाहिए।

खीरा खाने के fayde

खीरे को फल एवं शाक दोनों ही रूप में जाना जाता है। यह शरीर में खनिज लवण तथा विटामिंस की पूर्ति के लिए उत्तम आहार है। खीरा रोज उपयोगी फल के सा...