By Rachna Mishra
आरोग्य रक्षा की दृष्टि से छांछ एक महत्वपूर्ण पेय पदार्थ है। यह स्वादिष्ट, सुपाच्य, शक्ति एवं स्फूर्ति बढ़ाने वाला अमृतुल्य पेय हैं। पेट के रोगों के लिए यह रामबाण औषधि है। जिस प्रकार स्वर्ग में देवताओं के लिए अमृत प्रधान है, उसी प्रकार पृथ्वी पर मनुष्य के लिए छाछ प्रधान है।
आयुर्वेद की दृष्टि से मट्ठे के भिन्न-भिन्न लक्षणों के आधार पर इसका वर्गीकरण किया गया है -
मथित -
घोल -
Takra (मट्ठा)-
घोल- वात और पित्त नाशक है, mathit कफ और पित्त नाशक है, मट्ठा अथवा छांछ त्रिदोष नाशक है।
गाय के छांछ में विशेष गुण होते हैं, जो इस प्रकार हैं :-
१. वात रोग में छाछ एवं सेंधा नमक मिलाकर सेवन करना हितकर है।
२.कफ दोष में शॉर्ट पेपर मरीज और छार युक्त छांछ हितकर है।
३.हींग जीरा और सेंधा नमक मिलाया हुआ छांछ वात नाशक , अर्श और अतिसार दूर करने वाला है।
४.नमक मिलाकर छाछ का सेवन करने से ग्रहणी रोग(पाचन तंत्र संबंधी) दूर करने का कार्य करता है और बिना नमक का छांछ ग्रहणी औरअर्श (बवासीर)का विनाश करने वाला है।
५.वजन को नियंत्रित करता है। इसमें वसा की मात्रा कम हों जाती है जिसे ये वजन को कम करने में सहायक है।
६. छांछ में कैल्शियम की उपस्थिति हड्डियों को मजबूत बनाती है।
७. पानी की कमी की पूर्ति करता है, पेट की जलन में राहत मिलती है । पेशाब की जलन में भी लाभदायक है।शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता ।
८. छांछ के सेवन से त्वचा में चमक आती है, चेहरे के दाग धब्बे मिटाने का भी काम करता है।आटा के साथ मिला कर लेप लगाने से झुर्रियां कम होती हैं।
९. बालों के लिए भी छांछ का प्रयोग बहुत अच्छा होता है, छांछ में नींबूका रस मिला कर लगाने से सिर की रूसी और खुजली में आराम मिलता है।हफ्ते में दो तीन दिन छांछ द्वारा बालों को धोने से बालों में मजबूती व चमक आती है।
कच्चा छांछ कोष्ठ कफ का नाश करता है,कंठ स्थित कफ को बढ़ाता है। गरम छांछ पीनस, स्वास रोग में लाभदायक है।
छांछ नेत्ररोगोंका नाशक,बलकारक,रक्त और मांशवर्धक, पेट के दोषों को दूर करने वाला स्वादिष्ट पेय पदार्थ है।
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