Monday, April 4, 2022

नवरात्रि विशेष-धार्मिक व्रतों से आरोग्यता

आज पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित समुदाय के मन में यह प्रश्न अवश्य उठता है कि धार्मिक व्रतों के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार या सिद्धांत है या नहीं। अगर हम 200 वर्षों के इतिहास का सिंहावलोकन करें तो आज की तुलना में तत्कालीन भारतीय समाज अधिक स्वस्थ और निरोग था उसके पीछे बहुत बड़ा कारण धार्मिक व्रतों से आरोग्यता की प्राप्ति भी थी।
भारतवर्ष में नव वर्ष प्रारंभ से ही सभी तिथियों में व्रत का विधान है। सभी व्रत करने संभव तो नहीं तथापि प्रत्येक मास में कम से कम एक या दो व्रतों का पालन अवश्य करना चाहिए।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा इसी दिन से श्री राम नवमी चैत्र नवरात्र उत्सव का शुभारंभ होता है। अनेक स्त्री-पुरुष इस में उपवास रखकर भगवान श्री राम और भवानी माता की उपासना करके शांति और सुख प्राप्त करने की कामना करते हैं।
नवरात्रि व्रत के पालन से अनेक सामान्य रोगों से मानव मुक्ति प्राप्त करके स्वस्थ जीवन का अनुभव करते हैऔर मानसिक तनाव से छुटकारा पाकर भगवत प्राप्ति का सहज सुलभ साधन प्राप्त कर सकता है।
आरोग्य की दृष्टि से सप्ताह में कम से कम 1 दिन उपवास करके उस दिन से संबंधित देवी - देवता की आराधना  अर्चना करना पुण्य दायक है। सामान्यता दूध फल साबूदाना सिंघाड़ा मखाना आदि सात्विक सुपाच्य और हल्के पदार्थों का सेवन करना अत्यंत लाभकारी है ।संभव हो तो पूर्ण रूप से निराहार एवं निर्जल व्रत करना चाहिए ।अधिकांश व्रतों में दान करने की परंपरा भी है ।उपवास में नियम धर्म पालन करने वाले व्यक्तियों का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा ही साथ ही उनके व्यक्तित्व का भी विकास होगा।
अतः धार्मिक व्रतों का उचित पालन करने से शारीरिक शुद्धि होकर आध्यात्मिक शांति भी प्राप्त होगी। इन व्रतों के माध्यम से हम ईश्वर की भी प्राप्त कर सकते हैं।

-Rachna Mishra

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