आजकल मनुष्य प्रकृति से जितना दूर होता जा रहा है, उतना ही वह विभिन्न रोगों से घिरता जा रहा है। स्वास्थ्य तथा दीर्घायु तक जीने के लिए एक बहुत ही उपयोगी पदार्थ है, त्रिफला। यदि कोई व्यक्ति त्रिफला का नियमित रूप से सेवन करता है,तो वो सभी रोगों से मुक्त हो सकता है। त्रिफला रोगों की एक अमृत दवा है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं।
त्रिफला में तीन पदार्थ है आंवला, बहेड़ा और पीली हरण। इन तीनों का सम्मिश्रण त्रिफला कहलाता है, यह तीनों पदार्थ सहज में ही मिल जाते हैं ,इन्हें प्राप्त कर घर पर ही त्रिफला का निर्माण किया जा सकता है।
त्रिफला के लिए इन तीनों पदार्थों के सम्मिश्रण का एक निश्चित अनुपात है पीली हरण का चूर्ण एक भाग बहेड़ी का चूर्ण 2 भाग आंवले का चूर्ण 3 भाग तीनों फलों की गुठली निकाल कर खरल आदि में कूट कर चूर्ण बना लें यह मिश्रण कांच की बोतल में भर कर कर रख दे ताकि बरसाती हवा इसमें ना पहुंच सके। 4 माह की अवधि बीत जाने पर इसे काम में नहीं लेना चाहिए ,क्योंकि है उतना उपयोगी नहीं रहता।
त्रिफला के सेवन विधि का भी हमें ज्ञान होना चाहिए। इसका 12 वर्ष नित्य, नियमित रूप से प्रातः बिना कुछ खाए ताजे पानी के साथ एक बार लेना चाहिए। उसके बाद 1 घंटे तक कुछ नहीं खाना पीना चाहिए। कितनी मात्रा में लिया जाए उसका भी एक विधान है- जितनी उम्र हो उतनी ही रत्ती लेनी चाहिए, परंतु एक बात ध्यान रहे त्रिफला के सेवन से एक या दो पतले दस्त होंगे किंतु घबराना नहीं चाहिए।
यदि त्रिफला प्रत्येक ऋतु में निर्णय वस्तुओं के साथ मिला कर लिया जाए तो इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है।
१.अगस्त और सितंबर में त्रिफला को सेधा नमक के साथ लेना चाहिए।
२.नवंबर में त्रिफला को शक्कर या चीनी के साथ त्रिफला के चूर्ण का छठा भाग कर लेना चाहिए।
३.दिसंबर और जनवरी में सोंठ के चूर्ण के साथ ।
४.फरवरी और मार्च में पीपल के चूर्ण के साथ सेवन करना चाहिए।
५.अप्रैल और मई में त्रिफला का सेवन शहद के साथ करना चाहिए।
६.जून और जुलाई में त्रिफला को गुड़ के साथ चाहिए। प्रत्येक का छठा भाग।
इस क्रम और विधि से त्रिफला का सेवन करने से बहुत ही लाभ होता है। तन की सुस्ती दूर होती है। रोगों से मुक्ति मिलती है। नेत्र ज्योति बढ़ती है । शरीर सुंदर और बलशाली होता है। बुद्धि का विकास होता है । बल अच्छे होते जाते हैं। नेत्र ज्योति बढ़ती है। कंठ रोग दूर होते हैं ।वाक् सिद्धि प्राप्त होती है और तरुणाई आती है। इस प्रकार 12 वर्ष तक नियमित सेवन करना चाहिए।
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