By Rachna Mishra 🌿
आंवला सर्वश्रेष्ठ शक्ति दायक फल है। इसका दूसरा नाम अमृत फल है। सचमुच ही इसमें अमृत के गुण है। यह विटामिन सी का अनंत भंडार है। एक पुष्ट आवले में 20 नरंगिओं के बराबर विटामिन सी रहता है, इस प्रकार यह शरीर को स्वस्थ बनाने के साथ-साथ सुंदर भी बनाता है।
आवले के गुण -
२. आंवले की विशेषता यह है कि इसमें विटामिन गरम करने या सुखाने से भी नष्ट नहीं होते।
३. त्रिफला चूर्ण का मुख्य घटक आंवला ही है।
४.चवनप्राश आवले से ही बनता है।भुजबल युवा अवस्था को isthir रखने बुढ़ापा दूर करने की ये सर्वश्रेष्ठ औषधि है। एक कथा है -
महर्षि च्यवन ने बुढ़ापा दूर भगाने के लिए अश्विनी कुमार से उपाय पूछा था। उन्होंने चवन ऋषि को नित्य इस फल के सेवन करने के निर्देश दिए थे इसी के सेवन से चवन ऋषि का बुढ़ापा दूर हो गया था।
५. आंवला सर्व रोग नाशक दिव्य अमृत फल है यह दांतों मसूड़ों को मजबूत बनाता है ।
६.आंखों की ज्योति बढ़ाता है ।
७. शरीर में वीर्य की वृद्धि करता है। हाई ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग, कैंसर, नपुसंकता, मंदाग्नि ,स्नायु रोग, चर्म रोग लीवर और किडनी के रोग रक्त के रोग पीलिया, टीवी ,मूत्र रोग और हड्डी रोग दूर करने में इसका विशेष योगदान है।
८.आमला त्रिदोष नाशक है । इसमें लवड रस को छोड़कर बाकी पांचों रस भरे पड़े हैं। आधुनिक वैज्ञानिकों ने आंवला पर खोज की है और स्वीकार किया है कि अवला में पाए जाने वाला एंटी ऑक्सीडेंट एंजाइम बुढ़ापा को रोकता है। यह खोज तो हजारों वर्ष पहले भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों ने कर डाली थी ।
९.आंवला तेल सर के रोगों और बालों के लिए परम हितकारी है, इसे घर में बना लेना चाहिए बाजार में मिलने वाले अधिकांश आंवला तेल में कृतिम सेंट रहते हैं। घर में बनाना चाहे तो तिल के तेल में ताजे आंवले का रस मिलाकर गर्म करें उसका पानी जल जाए तो उतार कर ठंडा करके और प्रयोग करें।
आंवले में जितने रोग प्रतिरोधक, रक्तशोधक और बल वीर्य वर्धक तत्व है वो संसार की किसीअन्य वस्तु या औषधि में नहीं। इसलिए स्वास्थ्य सुख चाहने वालों को अपने आहार में आंवले को प्रमुख स्थान देना चाहिए। लगभग 20 ग्राम चवनप्राश एक गिलास दूध के साथ नियमित सेवन करने सेआप इसके के चमत्कारी फल से परिचित हो जाएंगे ।ये पूर्णता प्रदान करने वाला सर्वश्रेष्ठ आहार है।
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