शहद आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का महत्वपूर्ण तत्व है, इसके बिना आयुर्वेदिक औषधि उपचार अधूरा माना जाता हैं। प्रकृति में जो विविध पुष्प रस भरे पड़े हैं, मधुमक्खी इन्ही पुष्पों के से शहद तैयार करती है। कई प्रकार की मधुमक्खियां होती लेकिन अपनी देसी मक्खी का शहद ही गुणकारी और स्वादिष्ट होता है।
शुद्ध शहद की पहचान
शहद आदि काल से ही मधुर द्रव्य का प्रतिनिधि कर रहा है । इसके प्रयोग से ही इसकी उपयोगिता एवं औषधीय गुणों की जानकारी होती है। शहद में कई तत्व विद्यमान है, इसमें ग्लूकोस प्रक्टोज पर्याप्त मात्रा में होता है। शुद्ध शहद पानी में अपने आप नहीं घुलता, जबकि चीनी थोड़ी ही देर में स्वतः हो घुल जाती है, यह शहद की सामान्य पहचान है । जो शायद जितना गाढ़ा होगा, उसमें नमी की जितनी कमी होगी शुद्धता की दृष्टि से उतना ही अच्छा माना जाता है । शहद ठंड में जम जाता है और गर्मियों से स्वता ही पिघलने लगता है।
शहद के औषधीय गुण
१. शहद की अपनी तासीर गर्म होती है खासकर जिस समय इसे छत्ते से निकालते हैं उस समय इसका प्रभाव अधिक होता है, धीरे-धीरे इसका प्रभाव सामान्य हो जाता है ।
२. शहद का विशेष गुण यह भी है कि गर्म पानी में लेने से गर्म तथा शीतल पानी में मिलाकर उपयोग करने से ठंडा होता है। प्रातः और सायं गर्म पानी में मिलाकर शहद पीने से शरीर की चर्बी कम होती है।
३. आंखों में एक bood प्रतिदिन डालने से आंख की ज्योति बढ़ती है।
४. इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। गर्मियों में शहद की शिकंजी जिसमें एक बड़े गिलास में दो चम्मच शहद और एक दो बूंद नींबू का रस मिलाकर पीने से शरीर को तत्काल ऊर्जा मिलती है। और इससे पेशाब भी खुलकर होता है।
५. अदरक तुलसी के रस को चम्मच में गर्म कर उसमें शहद मिलाकर उपयोग करने पर यह योग खांसी जुखाम में रामबाण प्रमाणित होता है।
६.केवल शहद खाने से भी फायदा होता है शहद को खाते ही तत्काल घुलकर शरीर में सीधे ऊर्जा देता है। जितना जल्दी शहद पचता है, उतना जल्दी अन्य कोई पदार्थ नहीं पचता।
८.फोड़े फुंसियों पर एंटीसेप्टिक निरोधक का काम करता है । चेचक के दाग शहद और नीबू के रस से हलके किए जा सकते हैं । इन्हें मिलाकर लगाया जाता है जिससे चेहरे की कांति लौट आती है।
९. शहद का नित्य सेवन करने से दिल और दिमाग को शक्ति देता है, तथा दीर्घ जीवन प्रदान करता है ।
शायद को एक अर्थ में अमृत कहा जाता है। ज्यादा पुराना शहद अपना स्वाद, रंग और गुण खो देता है। इसलिए ताजे शहद का प्रयोग ही अधिक करना चाहिए।शहद का सेवन विशेषकर बच्चों और बूढ़ों को अधिक करना चाहिए।
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