By Rachna mishra
आम एक सुपरिचित उपयोगी फल है, कच्चा आम अम्ल, वात ,पित्त्ववर्धक और पका आम मधुर, बलदायक सुखदायक,वातनाशक,शीतल ,कफऔर वीर्यवर्धक है। आम की मंजूरी (बौर) शीतल रुचिकारक ,वातकारक, अतिसार ,कफ पित्त और रुधिर नाशक है।
पाल मे पकाकर भी आम खाया जाता है, परंतु इसमें जीवन शक्ति की न्यूनता होती है। आम का रस दूध के साथ पीने से शक्त्तिजनक और वीर्य वर्धक होता है। चूस कर प्रयोग किए जाने वाले आम को रसाल कहा जाता है। कलमी आम अत्यंत पित्तकारक होता है। आम के अति सेवन से मंदाग्नि, विषम ज्वर, रक्त दोष, नेत्र रोग उत्पन्न हो सकते हैं। अत्यधिक आम नहीं खाना चाहिए यह दोष कच्चे आम में देखे गए हैं। पके आम में विटामिन ए तथा सी अधिक मात्रा में होते हैं।
आम के अन्य उपयोग -
१. कच्चे आम को उबाल कर उसका रस निकाल कर उसमे भुना जीरा ,पुदीना और काला नमक डालकर पीने से लू नही लगती।कब्ज दूर होती हैं। पाचन क्रिया बढ़ती है। शुगर कंट्रोल होता है।पानी की कमी को पूरा करता है।
२. कच्चे आम की चटनी स्वादिष्ट होने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं।नई कोशिकाओं का निर्माण करती है। पेट संबंधी समस्याओं से छुटकारा दिलाती है।
३. कच्चे आम का अचार विटामिन k ,faibar एंटिऑक्सीडेंट युक्त होता है।इसे सीमित मात्रा में लिया जाए तो ये खाने का स्वाद भी बढ़ाता है।
४. पके आम में विटामिन c और फाइबर होता है जो की कैलोस्ट्रल को नियंत्रित करता है।विटामिन a आंखों के लिए उपयोगी है । पाचन क्रिया ठीक रखता है और मोटापा कम करने में भी सहायक है।
५.आम की गुठली भी बहुत गुणकारी है।इसकी गुठली को सुखाकर पीस लें व चूर्ण के रूप में इसका प्रयोग करे इसे पेट में गैस की समस्या से छुटकारा मिलता है। गुठली को मिस्री के साथ पीस कर दो चमचे दिन में तीन बार लेने से दस्त में लाभ होता है।
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