स्वस्थ जीवन के लिए दिनचर्या
By Rachna Mishra
संसार का कोई भी प्राणी ऐसा नहीं जो दुख चाहता हो सभी सुख चाहते हैं। यह तभी संभव है जब हमारा शरीर और मन पूर्णता स्वस्थ हो जिसके लिए आयुर्वेद में कुछ उपाय बताए गए हैं -
१. प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व उठे, रात्रि में अधिक देर तक ना जागे।
२. प्रतिदिन नियमित रूप से व्यायाम करें।तैरने से अच्छा व्यायाम हो जाता है।सप्ताह में कम से कम एक बार पूरे शरीर में तेल मालिश करें।
३. सुबह शाम टहलना लाभदायक है। नियमित रूप से टहलने से संपूर्ण शरीर की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं। रक्त संचार बढ़ता है, शरीर में चुस्ती फुर्ती आती हैं,धमनियों में रक्त के थक्के नहीं बनते। हृदय रोग मधुमेह और ब्लड प्रेशर में लाभ पहुंचता है।
४. धूप, ताजी हवा, साफ स्वच्छ पानी और सात्विक भोजन स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है।
५. नित्य योगासन प्राणायाम करने से रोग नहीं होते और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
६. स्नान करते समय पहले सिर पर जल डालना चाहिए, उसके बाद अन्य अंगों पर ।जल ना तो अति ठंडा हो और ना बहुत गर्म ।स्नान के बाद किसी मोटे तालियों से अच्छी तरह रगड़ कर शरीर पोछना चाहिए।
७. स्वाद के लिए नहीं स्वस्थ रहने के लिए भोजन करना चाहिए।
८. पानी या दूध तेजी से ना पिए इन्हेंधीरे-धीरे पिए। पानी बैठकर एवं दूध खड़े होकर पीना चाहिए।
९. भोजन के बाद दिन में थोड़ा विश्राम तथा रात में टहलना अच्छा रहता है।
१०. चिंता से हानि होती है, लेकिन चिंतन से मन का बुद्धि विकास होता है।
११. रात में त्रिफला पानी में भिगो दें सुबह छानकर इससे आंखें धोएं और बचे हुए जल को पी जाय।
१२. मुख धोते समय ताजे ठंडे पानी के छींटे आंखों में डालने से आंखें स्वस्थ रहती हैं। हफ्ते 10 दिन के अंतर पर कानों में तेल की कुछ बूंदें डालें।
१३. बिस्तर के गद्दे तकिए चादर आदि को समय-समय पर धूप दिखाएं ।
१४. कपूर अथवा चंदन का धुआं घर में कुछ क्षणों के लिए अवश्य करें।
१५.नमक और सरसों का तेल मिलाकर दांत और मसूड़ों में रगड़े इससे दांत मजबूत होते हैं और पायरिया से भी मुक्ति मिल जाती है।
१६. सोने से पहले पैरों को धोकर पोछे, कोई अच्छी स्वास्थ्य संबंधी पुस्तक पढ़े, नींद आने पर ही बिस्तर में जाएं ,बिस्तर में पड़े पड़े नींद की राह देखना बीमारी को निमंत्रण देता हैं ।
१७. रात्रि का भोजन, सोने के 3 घंटे पहले करें। भोजन की एक घंटा बाद फल या दूध ले।
१८. सुबह-सुबह हरी दूब पर नंगे पैर टहलना काफी लाभप्रद है, पैर पर दूब के दबाव से तथा पृथ्वी के संपर्क से कई रोगों की चिकित्सा स्वता हो जाती है
१९. भोजन के प्रारंभ में और अंत में अधिक मात्रा में जल ना पिए बीच में दो-तीन घूंट पानी पी सकते हैं
२०. केला दूध दही और मट्ठा एक साथ नहीं खाना चाहिए कटहल के बाद दही और मट्ठा एक साथ नहीं खाना चाहिए
२०. दूध के साथ नमक खट्टा फल दही तेल मूली और तुरई का सेवन नहीं करना चाहिए दूध के साथ आंवला मिश्री चीनी परवल अदरक सेंधा नमक लिया जा सकता है
२१. भोजन करने के बाद लघुशंका आवश्यक करनी चाहिए इससे गुर्दे स्वस्थ रहते है।
Keep going👏👏👌👌
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