Saturday, April 9, 2022

High blood pressure लक्षण, कारण एवं निवारण

 By rachna mishra

आयुर्वेद चिकित्सा के अनुसार वात, कफ और पित्त का सम होना ही स्वस्थ शरीर का लक्षण बताया गया है। उच्च रक्तचाप को आयुर्वेद में शिरागत वात कहा जाता है। शिरा और कोशिकाओं की दीवारों पर रक्त के अधिक दबाव के कारण उच्च रक्तचाप होता है।

उच्च रक्तचाप के लक्षण - 

१. रोगी के सिर में विशेषकर सिर के पीछे के भाग में कम अथवा अधिक दर्द होना।

२. रोगी को सुबह शाम चक्कर आना।

३. हृदय गति अधिक हो जाना दर्द महसूस होना।

५. कार्य करने में मन नहीं लगना, स्वभाव चिड़चिड़ा हो ना थोड़ा सा कार्य करने पर थकान आ जाना।

५. निद्रा काम आना अथवा टूट- टूट कर आना।

६. भूख कम लगना खाने में अरुचि होना।

७. पेशाब की मात्रा कम होना, पेशाब में चूरिक एसिड बढ़ जाना।

८. मल आदि का अनियमित त्याग।

आयुर्वेद की दृष्टि से उच्च रक्तचाप के कारण -

१. इसका मूल कारण शरीर में वात की अधिकता है इससे धमनिया कठोर हो जाती हैं।

२. यह अनियमित दिनचर्या के कारण भी हो सकता है। जैसे समय पर ना उठना, समय पर मल त्याग ना करना, व्यायाम न करना ,शाकाहारी भोजन ना करना, समय पर विश्राम ना करना, अनावश्यक परिश्रम करना और समय पर ना सोना।

३. अधिक शोक, मानसिक चिंता ,क्रोध होने से भी रक्तचाप बढ़ जाता है।

उच्च रक्तचाप निवारण के उपाय -

१.धमनियों की कठोरता को दूर कर उन्हें पुनः संकुचन शीलता लाना, ह्रदय की गति एवं स्पंदन की ताल में एक बद्धत्ता लाना और यह केवल आयुर्वेद द्वारा ही संभव हो पाया है।

२. कर्म ,वचन एवं मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें।

३. शारीरिक और मानसिक कार्य उतना ही करें जिससे अधिक श्रम ना पड़े।

४. प्रतिदिन यथासंभव घूमने जाए जहां प्रकाश एवं स्वच्छ हवा हो।

५. रोज तेल मालिश करके गुनगुने पानी से स्नान करें।

६. रात्रि में सूर्यास्त से पहले भोजन करें और निश्चित समय पर सोए।

७. मस्तिष्क को थकान ना आए ऐसा मानसिक कार्य करें, साहित्य पढ़े।

८.भोजन में नमक का प्रयोग कम करें।

९. नियमित व्यायाम करें। सुखासन, भुजंगासन बालासन, शवआसन अवश्य करें।

१०.फल ,सब्जियां अधिक खाए। वसा युक्त भोजन का प्रयोग कम करें। सात्विक आहार ले

११.बृहद वात चिंतामणि रस जो की स्वर्ण भस्म, रौप्य भस्म, लोहभस्म ,अभ्रक भस्म ,रस सिंदूर से बना होता है का सेवन उच्च रक्तचाप के लिए बहुत हितकर है।

१२. योगेंद्र रस, भ्रगराजसव रस ,धमासा जवाशा रस उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है।

प्रत्येक औषधि को अनुभवी शिक्षित वैध के मार्गदर्शन से ही लेना चाहिए। औषधियों को सही समय व मात्रा में ही ले।


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