by rachna Mishra
बिल्व वृक्ष प्रायः धार्मिक स्थानों विशेषकर भगवान शंकर की उपासना स्थलों पर लगाने की भारत में प्राचीन परंपरा है। बेल का महत्व धार्मिक दृष्टि से तो है ही। इसके स्वास्थ्य उपयोगी गुण भी हैं-
२. कैसा भी घाव हो बिल्व पत्र को जल में पका कर उस जल से धोने से धोने के बाद ताजे पत्ते पीसकर बांधे घाव को शीघ्र राहत मिलती है।
३. हृदय की घबराहट ,निद्रा एवं मानसिक तनाव पर इसकी छाल का प्रयोग बहुत ही लाभदायक है ।
४. श्वेत प्रदर और रक्त प्रदर में महिलाओं को इच्छा अनुसार गाय के दूध के साथ बेल के ताजे पत्तों को पीसकर थोड़ा जीरा मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करने से लाभ मिलता है।
५. नेत्रों का दुखना, लालिमा चढ़ाने में पत्तों को पीसकर पोटली बांधना हितकारी होता है। बच्चों के होने वाली पीली दस्त में एक चाय की चम्मच बिल्लो पत्र देने से लाभ मिलता है।
७. बेल का रस दिल की जुड़ी बीमारियों से आराम दिलाता है और ब्लड शुगर को भी कंट्रोल करता है।
८. गैस ,अपच और कब्ज की समस्या में भी बेल का शरबत राहत देता है।
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