एकमात्र मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जिसे विवेक और कर्म करने का सामर्थ्य प्राप्त है। पर यह सामर्थ भी पूरी तरह सफल तभी हो सकता है जब शरीर और मन दोनों पूर्ण स्वस्थ होते हैं।
स्वस्थ जीवन के कुछ मूलभूत सूत्र शास्त्र द्वारा वर्णित है जो निम्न प्रकार है -
१. आचार विचार:- आचार विचार परम धर्म है। सदाचार में लगे मनुष्य का शरीर स्वस्थ, मन शांत और बुद्धि निर्मल होती है एवं उसका अंतः करण शीघ्र शुद्ध हो जाता है।
२. प्रातः जागरण: - पूर्ण स्वस्थ रहने के लिए कल्याणकारी व्यक्ति को प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठ जाना चाहिए। जो सूर्य उगने के समय सोता है, उसकी उम्र और शक्ति घटती है तथा वह नाना प्रकार की बीमारियों का शिकार होता है।
३.उष: पान:- रात में ताम्र पात्र में रख कर ढका हुआ जल अवश्य पीना चाहिए, इससे कप वायु एवं पित्त दोष नाश होता है तथा व्यक्ति बलशाली एवं दीर्घायु हो जाता है। दस्त साफ होता है। पेट के सभी विकार दूर होते हैं।
४. मल मूत्र त्याग: - मल मूत्र का त्याग करते समय सिर को कपड़े से ढक लेना चाहिए तथा ऊपर नीचे के ना तो कुछ और से सटाकर रखना चाहिए। इससे दांत बहुत मजबूत होते हैं और बहुत दिनों तक चलते हैं। दांतों की कोई बीमारी नहीं हो पाती। मल मूत्र त्याग करते समय मौन रहना चाहिए।
५. व्यायाम तथा वायु सेवन: - शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कार्य करने में सामर्थ बनाए रखने के लिए, पाचन क्रिया तथा जठराग्नि को ठीक करने के लिए, शरीर को सुगठित और सुडौल बनाने की दृष्टि से, अपने आयु, बल ,देश और काल के अनुरूप नियमित रूप से योगासन तथा व्यायाम अवश्य करना चाहिए। सुबह और शाम को नित्य खुली ताजी और शुद्ध हवा में अपनी शक्ति के अनुसार थकान ना मालूम होने तक साधारण चाल से घूमना चाहिए।
६. तेल मालिश: - रोज सारे बदन में तेल लगाने पर बड़ा लाभ होता है। गले के नीचे तक सरसों का तथा मस्तक पर तिल आदि का तेल लगावे सिरका ठंडा रहना और पैर का गर्म रहना अच्छा है।
७. स्नान: - स्नान करते समय पहले मस्तक पर जल डालना चाहिए, उसके बाद पूरे शरीर में। भोजन के तुरंत बाद नहीं नहाना चाहिए।
८. भोजन: - जब भी भोजन करें तो पहले भगवान को निवेदन करके प्रसाद रूप से ही ग्रहण करें। पैरों को धोकर भली-भांति कुल्ला करके हाथ मुंह धो कर भोजन करना चाहिए। प्रसन्न मन से खूब चबा चबाकर भोजन करें आयुर्वेद के अनुसार एक ग्रास को लगभग 32 बार चबाना चाहिए इससे दांत मजबूत होते हैं और आंतों को भोजन पचाने में कम समय लगता है।
९. शयन:- रात में भोजन के तुरंत बाद सोना नहीं चाहिए। सोने के तो 3 घंटे पूर्व ही भोजन कर लेना चाहिए। भगवान का ध्यान कर बाई करवट सोना स्वास्थ्य के लिए उत्तम है।
-Rachna Mishra
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